12 ज्योतिर्लिंगों की कथा

१.सोमनाथ :- १२ ज्योतिर्लिंगों में  सबसे पहला ज्योतिर्लिंग सोमनाथ का है | यह गुजरात के सौराष्ट्र में स्थित है
कथा अनुसार प्रजापति दक्ष ने अपनी २७ कन्याओ का विवाह चन्द्रमा के साथ किया था | उन सभी में रोहिणी नाम की पत्नी चन्द्रमा को अत्यंत प्रिय थी इससे दूसरी स्रियो को बड़ा दुःख हुआ तथा उन्होंने यह बात अपने पिता दक्ष को बताई | दक्ष के समझाने के बाद भी जब चन्द्रमा पर इसका कोई प्रभाव नही पड़ा तब दक्ष ने
चन्द्रमा को क्षय होने का शाप दे दिया | शाप से मुक्ति पाने के चन्द्रमा ने अपने सामने शिवलिंग स्थापित कर  मृत्युंजय मंत्र द्वारा भगवान शिव की आराधना की तब भगवान शिव ने प्रसन्न होकर चन्द्रमा को वरदान दिया कि मास के एक पक्ष में आपकी कला क्षीण और दूसरे पक्ष में वह बढ़ती रहेगी | 

इस प्रकार भगवन शिव सोमेश्वर कहलाये तथा सोमनाथ ज्योतिर्लिंग नाम से प्रसिद्ध हुआ | 

२. मल्लिकार्जुन : - यह ज्योतिर्लिंग आन्ध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल नाम के पर्वत पर स्थित है।
जब कार्तिकेय पृथ्वी की परिक्रमा पूर्ण कर कैलाश पर्वत पर  आये और गणेश के विवाह आदि कि बात सुनकर क्रोंच पर्वत पर चले गए | जब माता पार्वती और भगवान शिव के अनुरोध करने पर भी नही लौटे तब शिव और पार्वती ज्योतिर्मय स्वरुप धारण कर यहाँ प्रतिष्ठित हो गए | उसी दिन से लेकर भगवान् शिव का एक ज्योतिर्लिंग मल्लिकार्जुन तीनो लोको में विख्यात हुआ | इसमें  माता पार्वती और शिव दोनों की ज्योतियाँ है 
मल्लिका का अर्थ पार्वती है और अर्जुन  शब्द शिव का वाचक है | 

३. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग:- यह ज्योतिर्लिंग  उज्जैन नगरी में स्थित है। 
शिव कथा अनुसार जब दूषण नाम के असुर ने उज्जैन पर आक्रमण किया जब नगर के ब्राह्मण बहुत घबरा गए उस दुष्टात्मा ने ज्यों ही उन ब्राह्मणों को मरने का प्रयत्न किया त्यों ही एक बड़ी भरी आवाज के साथ भूमि से विकटरूप धारी भगवान शिव प्रकट हो गए और दुष्टो का विनाश कर महाकाल नाम से विख्यात हुए | 

४. ओंकारेश्वर:- ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में स्थित है।
कहते है विंध्याचल पर्वत की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान् शंकर ने उन्हे  दर्शन दिए थे तथा उनके अनुरोध पर ही भगवान् शंकर वहाँ ज्योतिर्लिंग रूप में विद्यमान हो गए | उस स्थान पर जो एक ही ओंकारलिंग था वह दो स्वरूपों में विभक्त हो गया | प्रणय में जो सदाशिव थे वे ओंकार नाम से विख्यात हुए और पार्थिवमूर्ति में जो शिव ज्योति प्रतिष्ठित हुई , उसकी परमेश्वर संज्ञा हुई | 

५. केदारनाथ:- यह उत्तराखंड में स्थित है। भगवान् विष्णु के दो अवतार नर-नारायण बदरिकाश्रम तीर्थ में तपस्या किया करते थे | उन दोनों ने पार्थिव शिवलिंग बनाकर उसमे स्थित हो पूजा ग्रहण करने के लिए भगवान् शम्भू से प्रार्थना की | शिव अपने भक्तो के अधीन होने के कारण उनके बनाये हुए पार्थिव शिवलिंग में पूजित होने के लिए आया करते थे जब उन दोनों को पार्थिव पूजन करते हुए बहुत दिन बीत गए तब भगवान शिव ने प्रसन्न होकर वरदान मांगने के लिए कहा उनके ऐसा कहने पर नर-नारायण ने लोकहित की  कामना से भगवान शिव से वही स्थित हो जाने का वरदान माँगा | इस प्रकार उनके अनुरोध करने पर कल्याणकारी महेश्वर उस केदारतीर्थ में ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थित हो गए | 

६. भीमाशंकर:- भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पूणे जिले में सह्याद्रि नामक पर्वत पर स्थित है।
कुम्भकर्ण और कर्कटी का  पुत्र राक्षस भीम शिव भक्तो पर अत्याचार किया करता था | उन्ही भक्तो में राजा सुदक्षिण भी थे जिन्हे भीम ने पराजित कर बंदी बना लिया था किन्तु राजा कारागार में भी पार्थिव शिव लिंग बनाकर भगवान् शिव की उपासना किया करते थे जब भीम को यह पता चला तो वह राजा को मारने के लिए उद्धत हुआ अपने भक्त की रक्षा करने के लिए भगवान् कारागार में प्रकट हुए तथा एक हुंकार से उस दुष्ट का विनाश कर दिया तथा ऋषि मुनियो के आग्रह पर भगवान् शंकर वही ज्योतिर्लिंग रूप में स्थित हो गए तथा भीमाशंकर नाम से विख्यात हुए | 

७. काशी -विश्वनाथ :- यह उत्तर प्रदेश के काशी नामक स्थान पर स्थित है।| लोकहित के उद्देश्य से भगबान शिव हमेशा यहाँ विध्यमान रहते है | कहते है काशी शिव को अत्यंत प्रिय तथा इसकी सुरक्षा वे स्वयं करते है | 
 इसकी रक्षा के लिए भगवान शिव इस स्थान को अपने त्रिशूल पर धारण करते है | 
८. त्र्यंबकेश्वर:- यह महाराष्ट्र राज्य के नासिक जिले में स्थित है। गौतम ऋषि ने यहाँ तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया था इसके बाद भगवान शिव यही स्थित हो गए | 
९. वैद्यनाथ:-यह स्थान झारखण्ड प्रान्त, पूर्व में बिहार प्रान्त के संथाल परगना के दुमका नामक जनपद में पड़ता है| एक बार रावण ने अपनी कठोर तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया तथा वरदान स्वरुप अपने साथ लंका चलने को कहा ऐसा कहने पर भगवान शंकर सोच में पड़ गए और बोले तुम मेरे इस उत्तम लिंग को भक्ति भाव से अपने घर को ले चलो परन्तु जब तुम इसे कही भूमि पर रख दोगे तब यह वही स्थापित हो जायेगा | भगवान् के ऐसा कहने पर रावण शिवलिंग लेकर अपने घर की और लेकर चला परंतु मार्ग में भगवान् शिव की माया से से उसे मूत्रोत्सर्ग की इच्छा हुई सामर्थ्यशाली होने के बाद भी वह वेग को रोक नहीं सका फलस्वरूप उसने शिवलिंग एक ग्वाले को दे दिया थकावट महसूस करने के बाद उस ग्वाले ने शिवलिंग को वही पृथ्वी पर रख दिया और वह शिवलिंग वही स्थापित हो गया |

१०. नागेश्वर:-यह ज्योतिर्लिंग गुजरात के बाहरी क्षेत्र में द्वारिका स्थान में स्थित है। भगवान शिव ने अपने भक्तो की रक्षा करने के लिए दारूक नाम के राक्षस का वध किया था तथा नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हुए

११. रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग:-इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना स्वयं भगवान श्रीराम ने की थी। भगवान राम के द्वारा स्थापित होने के कारण ही इस ज्योतिर्लिंग को भगवान राम का नाम रामेश्वरम दिया गया है।

१२. घृष्णेश्वर मन्दिर:- घृष्णेश्वर महादेव का प्रसिद्ध मंदिर महाराष्ट्र के संभाजीनगर के समीप दौलताबाद के पास स्थित है। भगवान् शिव ने अपनी भक्त घुश्मा के मरे पुत्र को वापस जीवित कर दिया था तथा वही शिव लिंग के रूप में स्थापित हो गए इस प्रकार यह शिवलिंग घुश्मेश्वर शिवलिंग के नाम से विख्यात हुआ | 




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