भागवत पुराण के अनुसार कालिया नाग गरुड़ से बचने के लिए के लिए यमुना कुंड में छिप गए थे क्यों कि गरुड़ उसमे प्रवेश नहीं कर सकते थे | इससे उनकी रक्षा होती थी |
कथा -एक बार गरुड़ भूख से व्याकुल होकर यमुना कुंड पर आये तभी ऋषि सौभरि भी वहा पर आये | ऋषि के मना करने के बाद भी गरुड़ ने अपने भक्ष्य मत्स्य को पकड़ कर खा लिया||
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अपने मुखिया मत्स्यराज के मारे जाने के कारण मछलियों को बड़ा कष्ट हुआ | वे अत्यंत दीन और व्याकुल हो गयी | उनकी यह दशा देखकर ऋषि सौभरि को बड़ी दया आयी | उन्होंने इस कुंड में रहने वाले सब जीवों की भलाई के लिए गरुड़ को श्राप दे दिया कि यदि "गरुड़ फिर कभी इस कुंड में घुसकर मछलियों को खाएंगे तो उसी क्षण अपने प्राणो से हाथ धो बैठेंगे | महर्षि सौभरि के इस श्राप की बात कालिया नाग के अतिरिक्त और कोई साँप नहीं जानता था इसीलिए वह गरुड़ के भय से वहा रहने लगा था ||
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